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14 मई, 2009


ब्लॉग्स (3)
अभी कुछ समय पहले की ही बात है। मेरे एक परिचित के यहाँ दुकान का मुहूर्त रखा गया था। जिनके यहाँ दुकान का मुहूर्त था। वह काफी संपन्न और पैसे वाले घर के लोग थे। पैसे के इस अहंकार के चलते वो गरीब इंसान को कचरा समझने लगे। जब मुहूर्त का दिन नजदीक आया तो उन्होंने ... आगे पढ़ें...

जज- तुम्हारी पत्नी बार-बार क्यों भाग जाती है? रमन- क्या करूँ जज साहब! उसे पैदाइशी बीमारी है। जब छोटी थी तो पड़ोसी के यहाँ भाग जाती थी और अब गाँव-गाँव भाग जाती है। आगे पढ़ें...

एक दोस्त (दूसरे से)- आज सुबह जब मैं घूम कर आया तो मेरी बीवी ने बड़े प्यार से चाय की प्याली पेश की...। दूसरा बोला- लेकिन यार ! आज पहली तारीख नहीं है। फिर इतनी खातिरदारी क्यों? आगे पढ़ें...