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जब झुकी पौधों की गर्दन...


अभी कुछ ही समय पूर्व बच्चों ने घर में 10-12 गमले लाकर पौधारोपण किया। उन बच्चों को पेड़-पौधों से बहुत लगाव होने के कारण उन्होंने अपनी माँ की मर्जी के खिलाफ घर में पौधे लगाए। सभी बहुत ही खुश थे। नर्सरी से लाए गए वे छोटे-छोटे पौधे कुछ ही दिनों में काफी बड़े हो गए।

घरवाले काफी खुश थे कि सभी पौधों ने इतनी जल्दी-जल्दी अपना आकार बड़ा करना शुरू कर दिया। लेकिन इसी दौरान कुछेक दिनों के लिए परिवारवालों को बाहर जाना पड़ा। जाते समय वे अपने मकान मालिक से बरामदे में लगे पौधे को पानी देने के लिए कह गए और चाबी उन्हें सौंप दी।

उनके घर में भी तीन-चार लोग थे। लेकिन उनमें से किसी ने भी उन पौधौं को पानी देने की जहमत नहीं उठाई। तेज धूप और 4-5 दिनों ‍तक पानी न मिलने के कारण वे सारे पौधे मुरझा गए। और उन पत्तियों ने शर्म के मारे अपनी गरदन नीचे झुका ली, जैसे शिकाय‍त कर रही हो कि आपके जाने पर किसी ने हमारी ठीक से देखभाल नहीं की हो।

जब वो परिवार बाहर से वापस लौटा तो उन्हें अपने नन्हे-नन्हें पौधों की नीचे झुकी गर्दन और गमलों की सूखी पड़ी मिट्‍टी देखकर मन ही मन बहुत दु:ख हुआ। लेकिन समय रात का था इसलिए वे पौधों को पानी न दे सकें। और अपना मन मसोस कर सो गए। सुबह उठते ही जब सारे गमलों में पानी डाला त‍ब उन्होंने गहरी साँस ली और शाम तक पौधों के पत्तों के खिलने का इंतजार करने लगे।
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