गत वर्ष जब बारिश की कुछ फुहारें उस गमले पर पड़ी तो उस गमले में गिरी मंजूला से फिर नया तुलसी का पौधा खिल आया। 8-9 महीने के अंदर वह काफी बड़ा हो गया। वे लोग रोजाना उस पौधे को पानी देते और उस तुलसी को बड़ा होते देख मन ही मन खुश होते कि हमारी तुलसी कितनी बड़ी हो गई। फिर से उसकी मंजूला उस गमले की मिट्टी में गिरने लगी।
अभी एक माह पूर्व ही न जाने उस पौधे को क्या हुआ कि समय-समय पर पानी, खाद देने के बाद भी तुलसी का वह पौधा पूरी तरह मुरझा गया और उसकी सारी पत्तियाँ गिर गई। अब वह पौधा सिर्फ सूखी हुई लंबी डंडी के समान खड़ा है, जिसे देख कर मन ही मन यह खयाल आता है कि काश! यह तुलसी पहले की तरह फिर से खिल जाएँ।
उस पौधे की तरफ देखो तो ऐसा लगता है जैसे तुलसी का वह सूखा पौधा अपनी कहानी बयाँ कर रहा हो। तुलसी के पौधे का वह रूप देखकर मैं मन मसोसकर रह गई।
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